अध्याय मंच 3 : मंच - लाल आत्माएं - (एक लंबी कविता) - मेई वान फान - अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद : नीता पोरवाल / Chương III: Sân khấu. Trường ca Những linh hồn thẫm đỏ. Mai Văn Phấn. Neetta Porwal dịch từ tiếng Anh sang tiếng Hin-đi

मेई वान फान

अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद : नीता पोरवाल

Mai Văn Phấn

Translated from English into Hindi by Neetta Porwal

Neetta Porwal dịch từ tiếng Anh sang tiếng Hin-đi

 

 

 

Ms. Neetta Porwal, poet & translator

 

 

 

लाल आत्माएं

(एक लंबी कविता)

 

 

 

अध्याय 3

मं

 

 

दृश्य 1

 

मुझे एक खाली मंच का सपना दिखाई देता है. मंच के पीछे से मुझे कुछ आवाजें सुनाई देती हैं. हरेक दर्शक नाटक का मतलब अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर निकालता है। यह नाटक एक बैठक है, पार्टी को सुधारने का एक क्रम है, पारित प्रस्ताव को नीचे तक पहुँचाने के लिए और नियत कार्यों को सौंपने के लिए संगोष्ठी है, किसको क्या दायित्व मिला यह तय करने के लिए एक बैठक है, सार्वजनिक आकलन, समिति के निर्णय की घोषणा, वर्तमान घटनाओं की चर्चा, शुद्धिकरण, हिसाब-किताब, उच्च अधिकारियों के प्रतिनिधि के लिए स्वागत समारोह, आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम की पाली निश्चित करने, गुप्त मतदान सत्र का दिन है ...

 

मैं अभी भी उसी सपने में हूँ। मंच खाली है। मंच के गलियारों से आवाज़ें आती हैं, लाउडस्पीकरों के लिए अस्पष्टता खतरनाक होती  है। नीचे, दर्शक अपनी खामोशी बनाये रखते हैं।मंच के पीछे से प्रतिध्वनियाँ दोबारा सुनाई देतीं है। जोरदारबातचीत दलील देती आवाज़,  तर्क, बेचैनी भरी तेज आवाज, दिल से खेद प्रकट करती आवाज़। कोई लंबे समय तक खींचे गए वाक्य में बोलता है, एकालाप जिसे सुनकर ऐसा लगता है मानो फर्श पर नीचे फेंकी, आवाज करती किसी भारी चीज की तरह वे कभी बोलना बंद नही करेंगे। बात खत्म होने पर उठती एक दमदार आवाज, बंदूक लोडिंग की आवाज पर गोलीबारी की आवाज नही. पहले कभी सुनी एक महिला की रोती हुई आर्त्र आवाज। तेज चीखपुकार एक हकलाती आवाज। लोहे की किसी चीज से, एक दूसरे को पीटने की आवाज। एक आदमी की थरथराहट भरी आवाज। कंपकंपाती आखिरी आवाज। तभी खबर मंच के बाहर फैलती है कि अब सभी ने सहमति बना ली है। तो फिर एक शानदार सफलता। सुखद अंत!

 

 

 

दृश्य 2

 

बेंच की पंक्तियों को बड़े करीने से व्यवस्थित किया गया है। हर बेंच पर तीन लोग बैठ सकते हैं। समारोह मंच की पृष्ठभूमि, एक फूलदान और मेज़पोश है। अध्यक्ष अपने चेहरे पर गंभीरता ओढ़े हुए, मित्रवत और बड़े करीने से कपड़े पहने हुआ है। इशारा पर एक फलक पाकर, हर कोई चुपचाप मंच पर पहुँच गया है, और अपनी स्थिति में गया है, कोई किसी को नहीं छूता, सभी गंभीर मुद्राएं बनाए हुए हैं, ईमानदार, सीधे आगे की ओर देखते हुए। शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद, कोई सो जाता है। कोई खुद को दर्पण में देखता है और अपनी भौंहों को आकार देता है। कोई अपना सिर झुकाये, मुंह खोले हुए कान कुरेदने में लगा है। कोई अजीबोगरीब आवाज निकालते हुए अपनी उंगलियाँ चटका रहा है। कोई बगल में बैठे हुए पर अपनी कुहनी रख देता है, शायद कुछ कहना चाहता है। चेयरमैन सभी से ध्यान देने, एक-दूसरे से बात करने, कुछ लिखने और अपने फोन को बंद करने के लिए कहता है। दर्शक विद्रोही हो उठे हैं।  मंच पर कोई कुछ भी फेंक रहा है। कोई बड़बड़ा रहा है कि ऐसा दृश्य कोई भी कर सकता है। कई चल देते हैं और  कुछ मुख्तसर बोलते हुए चले जाते हैं।

 

 

 

दृश्य 3

 

अभिनेता एक पारंपरिक ओपेरा धुन पर अपने पैरों को एक स्थिति में किये हुए अपने पूरे शरीर को पंक्तिबद्ध कर  एक लय में लहरा रहे हैं। मंच पर एक कृत्रिम नाव तैरती है। कलाकार चप्पू चलाने का स्वांग करते हैं, फिर हाथों को आँखों के ऊपर ले जाते हुए गाते हैं,  ‘बड़े जोश से मछलियाँ तैरती हैं फिर वे अपने हाथों को अपनी आंखों की सीध में ले जाते हैं-  ‘बड़े जोश से उन्होंने मछलियों को निगल लिया’  ... बहुत सरलता से फिल्माए इस दृश्य ने कई दर्शकों को रुला दिया था। उन्हें उन  मछलियों से सहानुभूति होती है जो अब कभी बड़ी नहीं होंगी, क्योंकि वे पहले ही कांटे में फंस चुकीं थी, और पक्षी जो अभी उड़े ही थे, कभी बूढ़े नहीं होंगे, क्योंकि वे पहले ही जाल में फंस चुके थे। लाउडस्पीकर पर, आयोजन समिति लोगों को भावनात्मक होने से बचने के लिए याद दिलाती है, कि नाटक को अपने गहन चरमोत्कर्ष तक जाने का लंबा रास्ता तय करना है। आयोजक चेतावनी देते हैं कि यदि दर्शक बहुत उत्साहित हो गए, तो प्रदर्शन जारी नहीं रह सकेगा!

 

 

 

4 दृश्य

 

मंच दो भागों में बाँट दिया गया है, एक पक्ष जीवित दुनिया का प्रतिनिधित्व करता है और दूसरा मृतकों की दुनिया का। अभिनेता जो आत्माओं का पात्र निभा रहे हैं उन्होंने अपने चेहरे सफ़ेद और जो जीवितों का पात्र निभा रहे हैं उन्होंने अपने चेहरे गुलाबी रंग रखे हैं. एक अभिनेता ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाता है जिसकी मृत्यु अभी-अभी हुई है। जब उसका अंतिम संस्कार शुरू होता है, तो लोग उसे मंच के इस तरफ से दूसरी तरफ ले जाते हैं। अपना चेहरा सफ़ेद किये जाने के बाद, जब वह जीवित दुनिया की ओर देखता है और यह सोचकर वह अचानक ठंडे पसीने से तरबतर हो जाता है: कि इतने वर्षों तक दुनिया में रहने के बाद भी वह सरल सहज सत्यों से अनभिज्ञ रहा।

 

यहाँ एक बिल्कुल सीधा रास्ता था। एक घुमावदार भूलभुलैया वाला लुप्त हुए लोगों के पैरों के निशान एक दूसरे के द्वारा मिटा दिए गये थे  वे लुप्त होते रहे और बार-बार मिटते रहे। क्रांतियों ने दमनकारी अत्याचारियों को पलट दिया था। सफल क्रांतिकारियों ने राज्य पर शासन करने के लिए कदम बढ़ा लिए गये। समय के बाद, वे भी तानाशाह बन गए। लोगों को आजादी हासिल करने के लिए कई जिंदगियों को कुर्बान करना पड़ा लेकिन वे पेड़ों से सीखा सबक भूल गए- जो प्रकाश संश्लेषण की आजादी, खिलने की आजादी, फल उगाने की आजादी थी।

 

अचानक, कई सफेद-चेहरे वाली आत्माएं एक साथ इकट्ठा हो गयीं और दुनिया की तरफ अपनी उँगलियों से इशारा करने लगीं। थियेटर में  मृत और जीवित दोनों के ही अपने-अपने प्रशंसक थे।

 

 

 

दृश्य   5

 

यह दृश्य एक चलती फिरती कोर्ट का है जिसमें मौत की सजा पाए एक नृशंस कैदी के मामले की सुनवाई की जा रही है। अदालत उसे अपने आखिरी शब्द कहने का मौका देती है। वह बताता है कि वह यहीं पैदा हुआ और स्कूल भी गया था। जीवन ने उसे यही सिखाया कि न्याय ताकतवर लोगों की सम्पत्ति होता है। वह कबूल करता है कि अपराध करते समय वह सबसे ज्यादा ताकतवर रहा। अचानक एक जोशीला दर्शक चप्पल लेकर मंच पर कूदता है। सुरक्षा कर्मचारी उसे रोकते हैं और उसे शांत रहने के लिए कहते हैं क्योंकि यह सिर्फ एक नाटक है। उस समय तक, मौत की सजा पाए कैदी की भूमिका निभाने वाला अभिनेता बैकस्टेज चला जाता है। उसने अपना सारा मेकअप हटा दिया है और फिर अलग दिशा में शुरुआत करने के लिए बाहर निकल जाता है। भावुक दर्शक भी घर चला जाता है, पर वह वही सड़क पकड़ता है,  जिस पर से वह पहले गुजर चुका है।

 

 

 

दर्शकों को सलाम करते हुए

 

पूरे नाटक के दौरान, कोई भी संगीत, कोई गीत नहीं था। स्टेज की सभी लाइटस जल रहीं हैं। कलाकार एक-एक करके निकलते हैं, सभी एक जैसी मुस्कान ओढ़कर दर्शकों के सामने झुकते हैं। अब लोग हर अभिनेता को पहचानते हैं।

तालियां बिजली की तरह गरज उठतीं हैं और फिर लहरों की तरह शांत हो जाती हैं। कंक्रीट के मैदान पर सैन्य परेड में पांवों की नपी तुली आवाज की तरह तालियों की आवाजें सुनाई दे रहीं हैं।

बरगंडी पर्दा धीरे-धीरे गिरता है

 

 



English version: Era of Junk

Vietnamese version: “Thời tái chế”

 

 

 

 

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