आलाप प्रतिलाप 2 / Echo of the Aalap II / Âm vọng của Aalap II (thơ - poetry) - Mai Văn Phấn. माई वान फान. अनुवाद: रति सक्सेना – Rati Saxena dịch sang tiếng Hin-đi

Mai Văn Phấn - माई वान फान

अनुवादरति सक्सेना – Rati Saxena dịch sang tiếng Hin-đi

 

 

 


Nhà thơ-Tiến sỹ Rati Saxena

 

 

 

 

Bìa tập thơ “Âm vọng của Aalap” của HS. Ajay Kelang (Ấn Độ)

 

 

 

 

आलाप प्रतिलाप 2 / Echo of the Aalap II Âm vọng của Aalap(*) II

 

 

 

 

maivanphan.com: Nhà thơ - Tiến sĩ Rati Saxena vừa gửi tôi tập thơ bằng tiếng Hin-đi, có tên आलाप प्रतिलाप Echo of the Aalap Âm vọng của Aalap”, do Nxb KRITYA - Kerala, Ấn Độ ấn hành vào tháng 2/2016. Theo giải thích của bà, Aalap là bản nhạc không lời, thường được chơi trong âm nhạc cổ điển Ấn Độ, trước khi bài hát bắt đầu. Đây là tập thơ do Rati Saxena tuyển chọn một số bài thơ của tôi từ các bản tiếng Anh (của các Nhà thơ - Dịch giả Trần Nghi Hoàng, Frederick Turner, Susan Blanshard, Pornpen Hantrakool, Lê Đình Nhất - Lang, Nguyễn Tiến Văn) để dịch sang tiếng Hin-đi. Trân trọng cảm ơn Nhà thơ - Tiến sĩ Rati Saxena đã dành thời gian và tâm huyết cho tập thơ của tôi. Xin giới thiệu với Quý Bạn đọc 5 bài thơ (Nghé ơi!, Thu đến, Đỉnh gió, Vườn em, Mùa Trăng) rút trong tập thơ “आलाप प्रतिलाप / Âm vọng của Aalap”.

 

maivanphan.com: Poet – Dr. Rati Saxena has just sent me a poetry book in Hindi language called “आलाप प्रतिलाप / Echo of the Aalap”, published by KRITYA - Kerala, INDIA I in February, 2016. According to her explanation, Aalap is the musical note without words, usely sung in classic Indian music, before starting the song.... and prati lap means the echo of the Aalap. This poetry book was selected by Poet – Dr. Rati Saxena from some of my poems from English versions (translated by Poet - Translator Trần Nghi Hoàng, Frederick Turner, Susan Blanshard, Pornpen Hantrakool, Lê Đình Nhất – Lang and Nguyễn Tiến Văn) to translate into Hindi language. May I express my sincere thanks to Poet – Dr. Rati Saxena for her time and devotion to my poetry book! I am pleased to introduce to you readers 5 poems (Oh Buffalo Calf!, Autumn Came!, Wind Crest, Your Garden, Moon Season) from the poetry book “आलाप प्रतिलाप / Echo of the Aalap”.




भैंस का बछड़ा

 

 

भोर के बगीचे में वाष्प

रेशमी घास की ऊंचाई को छूती है

बुलबुलों से कहीं अधिक मुलायम

हवा को हरियाती हुई

 

भैंस का बछड़ा माँ को खोज रहा है

धान के खेत बादलों में साँस ले रहे हैं, दरख्तों की कलियाँ

मैदानों में धान के ढ़ेर पर गिर रही हैं

 

गेन्द उछलती हुई चली रही है

छुछन्दर झिंगुर और कीड़े अपने दंश निकाल रहे हैं

 

भोर की रोशनी भेंस के बछड़े की पीठ पर चित्रकारी करते हुए

आखें सहला रही हैं

 

मौसम के बदलने से हरी पत्तियों के मेहराब बन गए हैं

जिनके नीचे भैंस के बछड़े छिपे  हैं

 

मैं अपनी  परछाई के पीछे उसे वापिस लपेटने को दौड़ता हूँ

मैरे पैर लम्बी ऊँची  खड़ी  घास का स्पर्श करते हैं

 

 

 

 

पतझड़ आया

 

 

पत्तियाँ झड़ रही हैं

जमीन को ढाँपते हुए

घण्टियों की टनटनाहट से स्याम बादल छितरा रहे हैं

 

 

सूरज अब और गरम और तपन भरा होगा

उत्तरी पूर्वी हवा छोटी पगडंडियों पर लड़खड़ाती चल रही है

नई किताबों की खुशबूदार नन्ही साँस

गन्ने की मिठास लबलबा रही है

 

सदियों साल राने दरख्त के नीचे कीट आराम से अण्डों की चमकदार रेख बो रहे हैं

बछड़ा अपनी जीभ से घास की पत्तियों को सहला रहा है

 

पत्तियाँ झड़ रही है

जाने कौन भाग्यवान इस क्षण को महसूस करता है

पतझड़ का मौसम लौट आया है

 

 

 

 

हवा का शिखर

 

 

शिला की नुकीली सतह पर रेंगती

हवा की देह रगड़ती हुई रेंग रही है

 

बरसात हवा का रक्त  है

सूरज की रोशनी टपक रही है

 

पर्वत चुम्बन उछाल रहे हैं

सलेटी बादल झुण्ड में खड़े हैं

 

पर्वतों ने अपनी बाहें पसार लीं,

जमीन पर पाँव पटक कर

खुशबुओं को कुचलते हुए

हवा की देह को टुकड़ों में कुतर दिया

तारों की रोशनी गिर रही है

भोर फूटने वाली है

 

ढ़लाव के सबसे ऊपरी हिस्से में

दो आँखें नीचे  झाँक रही हैं

 

चुम्बन ऊपर एकत्रित हो रहे हैं

हवा दूसरी चोटी पर चढ़ रही है

 

2

 

रोपने के लिए तुम्हारे मुहाने को खोज

कोमल हवा धरती की टांगो पर चढ़

घाटी में गोता लगा रही है

 

पहाड़ियों और पर्वतों की सड़ी अंतड़ियाँ

घुमक्कड़ी हवा का सीना

जमीन पर खेल रहे हैं

 

चमकदार कवच तड़का

बसन्त ने अन्न के मुहाने को खोल दिया

 

बीजपत्रों के अंकुरित होने के इंतजार में

हवा को जमीनी रास्ता पकड़ना पड़ रहा है

 

3

 

मैंने दरवाजे को कस कर बन्द कर दियाहवा बह रही थी

सहसा श्वास रहीत वस्तुओं का स्मरण हुआ और दम घुटने लगा

 

हवा की आँख मुझे तुम्हारे भीतर खींच रही है

भीतर ही भीतर मथ रही है

 

हौले हौले एक पुल पार होता है

मेरी देह हवा से झुक गई है

रैलिंग पर टंगे तौलिये सा लटकी

शान्त नदी में बहती हुई टपकने लगी है

 

हवा की देह को काटती रेलगाड़ी का स्मरण आता है

धुएं के खम्भे उलटे हो रहे हैं, सहसा साइरन की आवाज गायब हो गई

 

मेरी साँस तुरही की नली में रुक गई

पताका का चमकदार दवाब फैलने लगा है

घुड़सवार की पीठ और हवा के शिखर पर

पतंगे के कोमल परों को  उड़ाते हुए

 

बाहर पत्तियों के ढ़ेर  बिखरे हैं

घूमते , फैलते, उन्मुक्त आकर्षण को सन्तुष्ट करती

वासना का अवरोध हो रहा है

 

 

 

 

तुम्हारा बगीचा

 

 

बरसात के बाद यह लता कुछ ओर क्षीणकाय हो गई है

पात गात कितने चिकने और हरियाये हैं

इसके पत्र हस्त तो सदैव ही कोमल हैं

 

बच तन्ह# चिड़िया की आवाज जाल से टकरा

मुझे पोमेलो और बैंजिनीयम अंजीर की जड़ से बाँध रही है

मालेन लेवेण्डर जरनेयिम....

मौसम को खुशगाह बना रहे हैं

 

तुमने अपनी आँखे मूंद ली, अब हर ओर  आँखे चमकने लगीं हैं

 

मैं प्रातःकालीन नौका

धूप के टुकड़े पर पाँव रखता हूँ

तुमने मुझे कहा था ना, कि तुम्हारा इंतजार करूँ, जब तक कि दरवाजा बन्द हो जाये

 

# एक प्रजाति की चिड़िया

 

 

 

 

चन्द्र काल

 

 

चाँद करवट बदल कर लेटा है

चुम्बन उसके ऊपर टंगे हैं

धुंध का पर्दा, किसी अजनबी घास की गंध

 

यह नहर के किनारे है

पुल के करीब नन्ही सी नौका की परछाई

चट्टानी किनारे पसीने की अजनबी गंध में निश्चल लेटे हैं

अर्ध रात्रि में चन्द्र बिन्दुएँ टप टप टपक रही हैं

 

तुम्हारे हाथ चाँद को खोज रहे हैं

रात की हर एक उंगली चमक रही है

एक पावन मार्ग

खुशबुओं की सांसे महक रही है

 

आवाज  की डोरियाँ दिन में फैल रही हैं

चाँद के साथ साथ, हंसता बतियाता चाँद

उसके पारदर्शक रंग को रूंधते हुए

 

2

 

बलखाती घास की लहरों पर प्रतिध्वनित होती पत्तियों वाले

स्थल को छिपाती पहाड़ो की ऊँचाइयाँ, और जंगल

 

जल की त्वचा इतनी कसी है कि कोई लौल भी नहीं गुजर सकती

कूकबुरा चिड़िया के पंखों  के चमकदार रंग

मुझे चन्द्र लहर में प्रतिध्वनित कर देते हैं

 

मैं तुम्हारा हाथ बढ़ा के स्वागत करता हूँ, तुम्हारी फुलकारी वेश से

हवा सरसराती उतरती है. मैं तुम्हारा चुम्बन लेता हूँ

मेरी छोटी उंगली तुम्हे चाँद तक उठाती है

 

सुहाना मौसम मेरे तलवों से उठता है

धरती के सीने मेंदिल धड़कता है

चन्द्र तरंगों की  धारा स्तंभो का आलिंगन कर रही है

 

तेजी से फिसलते हुए, मेरे पदचिह्न

धरती पर चमक रहे हैं, मेरा हाथ  इनके साथ है.

 

अब जरा थमों, मुझे सुनो

सारी गलियाँ, सारे कस्बे, ढ़लाँव, खाड़ियाँ

मक्के के खेत, धान खिलखिलाना सीख रही हैं

                                    गाना सीख रही हैं

 

3

 

 

कबूतर अपने साथ

दुपहरी को ले

पंखफड़फड़ाते हुए लौट आया है

दुपहर सलेटी पंखों में सजी है

गले और मुकुट में सुफेदी लिये हुए

नन्हे नन्हें पंजों से चाँद की ओर बढ़ते हुए

 

दिन  दिपदिपा  रहा है

ताजे पुष्प गुच्छ लटके हुए

कोमलता से बन्द होते है

यह समय समागम का है

 

अंधेरे के राज्य  को रोशनी देने को

पराग और जन्म के पुरातन समय मे

                        बीज समागम कर रहे हैं

 

गहराती रात के चाँद की उनीन्दा कामनाएँ

 

बूढ़े खूंटे के घुटने टकरा रहे है्

हवादार पहाड़ी पर आँख मून्दे हुए

खेत में बीज गिर कर अंकुरित हो खिलते हैं

 

कल यह जमीन और जहान बदल जायेगा

 

 

 

 

Translated from Vietnamese by Trần Nghi Hoàng

Edited by Frederick Turner

 

 

 

 

Oh Buffalo Calf!

 

Steam early in morning, garden deep into night

Rising high to each edge of silky grass

Smoother than layers of fuzz

Greener upwind

 

Buffalo-calf looks for his mother

Respires into clouds, the sounds of rice fields, trees budding

Knocking of hooves on the ground

The round ball bouncing up

Mole - cricket, mantis throwing the pair of sturdily built pincers

The early sunshine illuminates the body of buffalo-calf

Spreading out the caressing eyes look

 

Interchange of seasons vault of green leaves stretches tight

Hides underneath the bridge, waiting for buffalo-calf

I run after my shadow to roll it back

Feet touch the grass jumping up high.

 

 

 

Autumn Came!

 

 

That leaf falling

The ground will sink down

Resounding the bell dispels dark clouds

Sun will be hot and dry

The northeast wind trembles into a small alley

New books fresh as infant breath

Sweet of sugarcane overflowing at the top

The patient worms plaiting shiny streaks of ovum around the base of century-old tree

The young calf touching his soft tongue on grass blades

That leaf falls

Don’t know anybody lucky to come close

Moments fall back.

 

 

 

Wind Crest

 

I.

Crawling on sharp tops of the rock

Body of wind scratches

 

Blood of wind is rain

Sunshine drips down

Mountains roll the kiss up high

Gray clouds cast into black

Mountains open wide their arms, trampling feet into ground

Crushing into fragments

Tears the body of wind into pieces

The starlight falling

Morning bursting out

Up to the top of slope in a flash

Open eyes look down

 

The kisses heaped higher

The frenzied wind rolls up on another crest.


II.

 

Finding your mouth to sow

Wind clinging to tender limbs of land

Plunge down to the abyss

Rot the bowels of hills and mountains

Chest of wind drifting

Playing on the ground

 

The shell cracked flash

Spring overflows the grain mouth

Waiting to sprout the cotyledons

Wind will carry the ground away.

III.

 

Shut tight the door the more wind blows

Things suddenly remembered, tighten in my chest

The eye of wind swept me into you

Turning quickly round and round

 

Swiftly passing a bridge

My body was bent by the wind

Hung like a wet towel across the railing

Dripping down into a swift-flowing river.

 

Remembering how the train cuts through a body of wind

Columns of smoke overturn and siren sounds disappear in an instant

My breath is constrained through the trumpet-reed

The pressure like an eagle wings spreading wide

Raising fragile dragonfly wings

Cavalier on the wind’s crest

Outside the vault of leaf disorder

Torn to satisfy the frenzied excitement

This inhibition of lust.

 

 

 

Your Garden

 

After rain the trees is a slim figure

Smooth green two-sides of the leaf

A leaf’s hand always soft

Sound of Bách Thanh bird tossing the net

Tightens against me with pomelo and root of benjamin fig

Mallow, lavender, geranium...

The garb of autumn most gentle

You shut your eyes, the eyes that sparkled everywhere

 

I stepped upon a piece of sunshine

Our early morning boat

You told me to wait while you to locked the gate tightly.

 

 

 

Moon Season

 

I.


The moon turned to lay on its other side

Overhanging other kisses;

A curtain of fog, the smell of other grasses.

 

It was by a canal:

The silhouette of a small boat against the bridge

The rocky shore lying still to listen to strange sweat

Of midnight moonlight falling drop by drop.

 

Your hands are searching for the moon.

Every finger of the night is a glitter,

A pure roadway

Awakes a breath of fragrance.

 

The string of sounds overflows to day,

Going along with the moon, a laughing and speaking moon,

Spilling forth transparent color.

II.

 

Leaves re-echo the waves of tangled grass

In that place hidden from mountain heights, are forests themselves;

The water’s skin stretched so tight, no waves pass;

The lissome colors of the kookaburra’s back

Transforms me into a flap of moon.  

I lead you by the hand, the wind lifts up your flower dress;

I kiss you, my little finger

Lifts you up to the moon.

The good weather rises under my feet,

A heart throbs in the land’s chest,

A stream of moonlight around the trunk.

Moving faster, my footprints

Lighter on the earth, my hand lengthens along it.

 

Slow down now, listen to me:

All the streets, the districts, slopes, estuaries,

All the cornfields, the paddies are learning to laugh, practicing to sing...

III.

 

The pigeon was back,

Bringing the afternoon along

Clasped in its wings:

 

An afternoon dressed in grey plumage,

With a white compartment at neck and crown,

With tiny claws, as it steps up to the moon.

The day, dazzling and radiant

Droops the virginal flower

Tenderly shutting it down:

 

This is the time to make love,

To light up the dark territory;

The ancient season of pollen and birth, the seeds’ combining,

 Passion and slumber in late night moon.

Clasping the knees of old stumps,

Closing their eyes on the windy hill,

The seeds fall in the mud, fermenting, loose.

 

Tomorrow this earth

And the whole world will change.

 

 

 

 

Nghé ơi!

 

 

Hơi nước ban mai vườn khuya

Dâng cao bờ cỏ mượt

Mịn màng hơn lớp lông tơ

Xanh lên gió

 

Nghé tìm mẹ

Thở vào mây tiếng ruộng mạ, mầm cây

Gõ móng trên mặt đất

 

Trái bóng tròn vội vã nảy lên

Con dế trũi, con ngựa trời tung đôi càng chắc mẩy

 

Nắng sớm rọi mình nghé

Lan xa âu yếm mắt nhìn

 

Giao mùa vòm lá chật căng

Nấp dưới gầm cầu đợi nghé

 

Tôi chạy theo cuộn lại bóng mình

Bàn chân chạm bật cao mặt cỏ.

 

 

 

 

Thu đến

 

 

Chiếc lá kia rơi

Mặt đất sẽ trũng xuống

Vọng tiếng chuông xua mây đen

 

Nắng sẽ hanh hao

Heo may run ngõ nhỏ

Sách mới thơm hơi trẻ thơ

Mía ngọt trào lên ngọn

 

Những con sâu nhẫn nại tết vệt trứng óng ả quanh gốc cây già

Chú bê non chạm lưỡi mềm mặt cỏ

 

Chiếc lá ấy rơi

Biết có ai được may mắn đến gần

Thời khắc mùa thu về đích.

 

 

 

 

Đỉnh gió

 

 

I.

 

Nhoài lên mỏm đá sắc

Thân thể gió trầy xước

 

Máu của gió là mưa

Nắng nhỏ xuống

 

Núi cuốn nụ hôn lên cao

Cụm mây xám đúc thành khối

 

Giang tay núi đạp chân vào đất

Vò nát

Xé toang thân gió

Ánh sao rơi

Buổi sớm vỡ oà

 

Thông thốc lên mỏm dốc

Mở mắt nhìn xuống

 

Những nụ hôn chồng xếp cao hơn

Gió cuồng nộ cuộn lên đỉnh khác.

 

II.

 

Tìm miệng anh gieo hạt

Gió níu chân tay đất dịu dàng

Lao xuống vực

 

Thổi rỗng lòng đồi núi

Ngực gió thả trôi

Vờn trên đất

 

Chớp sáng nứt vỏ

Mùa xuân trào miệng hạt

 

Chờ nảy lá mầm

Gió mang mặt đất đi

 

III.

 

Đóng chặt cửa gió càng thổi

Điều chợt nhớ cũng bạt hơi, tức ngực

 

Mắt gió cuốn anh vào em

Xoay tít mù chong chóng

 

Thoáng một cây cầu

Thân thể anh bị gió bẻ gập

Rũ xuống tựa chiếc khăn ướt vắt qua hàng lan can

Nhỏ xuống dòng sông chảy xiết

 

Nhớ đoàn tàu lao qua xẻ ngang mình gió

Cột khói vật ngược cùng hồi còi phút chốc mất tăm

 

Hơi thở anh co thắt qua lưỡi gà cây kèn

Mắt quắc sáng áp lực đại bàng xoải rộng

Nâng cánh chuồn chuồn mỏng manh

Ung dung ngả lưng đỉnh gió

 

Ngoài kia những vòm lá rối

Lay giật tả tơi cho đã cơn hưng phấn điên cuồng

Cơn ức chế thèm khát.

 

 

 

 

Vườn em

 

 

Sau cơn mưa dáng cây thon nhỏ

Mướt xanh hai mặt lá

Bàn tay lá ấy luôn mềm

 

Tiếng chim Bách Thanh tung lưới

Thít chặt anh cùng bòng bưởi, rễ si

Hoa cẩm quỳ, oải hương, phong lữ…

Dịu dàng thêm khăn áo mùa thu

 

Mắt em lóng lánh khắp nơi khép lại

 

Anh bước lên vạt nắng

Một con thuyền ban mai

Em bảo hãy chờ để khoá chặt cổng.

 

 

 

 

Mùa Trăng

 

 

I.

 

Trăng đã về bên kia

Phủ lên những nụ hôn khác

Màn sương, mùi cỏ khác

 

Nơi ấy một dòng kênh

Bóng con thuyền nhỏ qua cầu

Bờ đá nằm im nghe mồ hôi lạ

Giọt giọt trăng khuya

 

Bàn tay em tìm trăng

Từng ngón đêm lóe sáng

Một con đường thanh sạch

Thức dậy làn hương

 

Chuỗi thanh âm tràn dâng ngày

Men theo trăng, cười nói trăng

Nghẹn thở một màu trong suốt.

 

II.

 

Vang trên mặt cỏ rối, lá cây

Nơi đại ngàn không nhìn thấy

Mặt nước giãn căng không sóng đi qua

Màu óng ả trên lưng chim bói cá

Cho anh thành vạt trăng

 

Anh dìu em lồng lộng váy hoa

Hôn em, ngón tay út

Nâng em lên trăng

 

Mưa thuận gió hoà gót chân

Trái tim rộn ràng ngực đất

Dòng trăng cuồn cuộn thân cây

 

Lướt nhanh nữa cho đất đai thêm sáng

Dấu chân, bàn tay anh dài theo

 

Hay chậm lại lắng nghe anh nói

Cả phố phường, triền dốc, cửa sông

Cùng ngô lúa đang tập cười, tập hát…

 

III.

 

Con bồ câu đã về

Mang cả buổi chiều

Kẹp trong đôi cánh

 

Một buổi chiều khoác bộ lông màu lam

Cổ và đỉnh đầu khoang trắng

Cùng móng chân bé xíu bước lên trăng

 

Ngày chói gắt và rạng rỡ

Rũ trên đóa hoa trinh nữ

Dịu dàng khép lại

 

Đây là thời khắc ái ân

Thắp sáng lãnh địa bóng tối

Mùa phồn sinh thụ phấn, kết hạt

Mặn nồng thiêm thiếp trăng khuya

 

Bó gối những gốc cây

Nhắm mắt ngọn đồi gió

Hạt giống rơi trong bùn ngấu thảnh thơi

 

Ngày mai mặt đất này

Và thế giới sẽ đổi khác.

 

 

 

 

 


Bìa 1 & 4 tập thơ “Âm vọng của Aalap” của Họa sỹ Ajay Kelang


 

 

 

 

 





















_______

(*) Aalap là bản nhạc không lời, thường được chơi trong âm nhạc cổ điển Ấn Độ, trước khi bài hát bắt đầu.

 

 

 

 

 

 


Bìa 1 & 4 tập thơ “Âm vọng của Aalap” của Họa sỹ Ajay Kelang





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(*) Aalap là bản nhạc không lời, thường được chơi trong âm nhạc cổ điển Ấn Độ, trước khi bài hát bắt đầu.

 

 

 

 

 

 


Bìa 1 & 4 tập thơ “Âm vọng của Aalap” của Họa sỹ Ajay Kelang





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(*) Aalap là bản nhạc không lời, thường được chơi trong âm nhạc cổ điển Ấn Độ, trước khi bài hát bắt đầu.

 

 

 

 

 

 


Bìa 1 & 4 tập thơ “Âm vọng của Aalap” của Họa sỹ Ajay Kelang





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